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Showing posts from July, 2021

BIHAR DElEd NOTES PDF 2nd YEAR बिहार डी.एल.एड सेकेंड ईयर के सभी विषय का नोट्स

   BIHAR DElEd NOTES PDF 2nd YEAR   बिहार डी.एल.एड सेकेंड ईयर के सभी विषय का नोट्स  नीचे बिहार डी.एल.एड. सेकेण्ड ईयर (Bihar DElEd Second Year) के सभी सब्जेक्ट (All Subject ) का नाम दिया गया है एवं सब्जेक्ट(Subject) नाम के निचे उस सब्जेक्ट से सम्बन्धित महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर (नोट्स -NOTES ) दिया गया है , जिस प्रश्न का उत्तर चाहिए उसे क्लीक करने से उसका उत्तर मिल जायेगा | बिहार डी एल एड के सेकेण्ड इयर में S-1 से लेकर S-9 तक विषय है | फर्स्ट इयर में F1 , F2 कोड था , लेकिन सेकेण्ड इयर में S 1 , S 2 ,S 3 कोड है | बिहार डी एल एड सेकेण्ड इयर के सभी विषय का नाम निम्नलिखित है , जिसे उसके कोड के साथ लिखा गया है ,एवं सब्जेक्ट(Subject) नाम के निचे उस सब्जेक्ट से सम्बन्धित महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर (नोट्स -NOTES ) दिया गया है , जिस प्रश्न का उत्तर चाहिए उसे क्लीक करने से उसका उत्तर मिल जायेगा | S-1 - समकालीन भारतीय समाज में शिक्षा  NOTE - जल्द ही इस पेपर में और प्रश्न तथा उसके उत्तर जोड़े जायेंगे | S-2 - संज्ञान, सीखना और बाल विकास प्रश्न -01 Jean Piyaje जीन पिय...

BIHAR DElEd NOTES PDF 1nd YEAR बिहार डी.एल.एड सेकेंड ईयर के सभी विषय का नोट्स

F-1: F-2 F-3 F-4 F-5 F-6 F-7 F-8 F-9 F-10 F-11 F-12 All face to face paper codes NOTES Coming Soon By- Prof. Rakesh Giri Epam Siwan 

Bihar DElEd इकाई -1 गणित शिक्षण की प्रविधियाँ एवं संसाधन

  21st July 2021 गणित शिक्षण का रचनावादी नजरिया, इकाई -1 गणित शिक्षण की प्रविधियाँ एवं संसाधन ( MATHEMATICS TEACHING METHODS AND RESOURCES ) Bihar D.El.Ed. 2nd Year Rakesh Giri Share Tweet Pin Mail SMS परिचय ( Introduction ) गणित की कक्षा में जाने के क्रम में जब हम कक्षा – पूर्व तैयारी करते हैं तो अनेक अनुभवों यथा बच्चों को अवधारणा पर कैसे लायेंगे , उनसे विषयवस्तु से जुड़ी कौन – सी गतिविधियाँ करायेंगे , उनके मध्य कैसी सामग्री प्रदर्शित करेंगे , बच्चों की सक्रिय सहभागिता हेतु क्या करेंगे , नयी अवधारणा को उनके बीच कैसे प्रस्तुत और स्पष्ट करेंगे , बच्चों ने सीखा या नहीं इसकी जाँच कैसे करेंगे आदि को ध्यान में रखते हैं । शिक्षण अधिगम प्रक्रिया की जो संरचना हमारे द्वारा की जाती है उसमें उपरोक्त अनुभवों को भी एक क्रमबद्ध ढंग से प्रस्तुत किया जाता है । अधिगम प्रक्रिया का यह क्रमबद्ध प्रस्तुतीकरण ही शिक्षण विधि कहलाती है । हमारे पढ़ाने का तरीका और पाठ को कक्षा में प्रस्तुत करने का तरीका कैसा हो ? यहाँ न केवल हमारे शिक्षण कौशल वरन् पाठ्यवस्तु की प्रकृति , बच्चों के सीखने के तरीके , कक्षा में...

भाषा के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक संदर्भ(social, cultural and political context of language)

  भाषा के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक संदर्भ(social, cultural and political context of language) प्रस्तावना: सामाजिक सांस्कृतिक संदर्भ तत्पर्य है कि मानव अकेला नहीं सकता। भाषा ही उसे समाज और संस्कृति से जोड़ती है और वही इसे ज्ञान प्राप्ति होती है। इसका तात्पर्य है कि जब भाषा सीखी जाती है तब उसे सामाजिक सांस्कृतिक परिवेश को भी ध्यान में रखना चाहिए जिसमें वह देखी जा रही है और ज्ञान को भी उसी से जोड़ना चाहिए। उदाहरण के लिए,अधिगमकर्ता जब विज्ञापनों को देखते हैं तो वह विज्ञापन तभी प्रभावी बनते हैं जब उस संस्कृति से संबंधित किरिया को उचित भाषा के प्रयोग द्वारा प्रस्तुत किया जाए। एक कक्षा में सामाजिक सांस्कृतिक संदर्भ से संबंधित क्रियाएं की जा सकती है। जैसे कहानियां, अखबार या पत्रिका की खबरों का विश्लेषण करना, खिचड़ी भाषा अलंकारिक भाषा का भी विश्लेषण करना। सामाजिक सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य मनोविज्ञान के क्षेत्र में उपयोग किया जाने वाला एक ऐसा सिद्धांत है जिसमें मानव के आसपास की परिस्थितियों की व्याख्या और उनका व्यवहार किस प्रकार परिस्थितियों और सामाजिक और सांस्कृतिक कार्य को से प्रभावि...

INDIAN SOCIAL STRUCTURE: ITS NATURE :- C-2 : contemporary India and education Notes in hindi and English , B.Ed first year

  ★ 1.3 INDIAN SOCIAL STRUCTURE: ITS NATURE :-  The Indian society is composite of different races, cultures, religions and faiths. Seemingly, it is a society with many-sided diversities. But unity is integral. There is some underlying power which keeps us as a whole and binds us in continuity. It has its own conflicts, dissensions and differences. Yet it remains combined as a unit. What are the problems and obstacles which weaken it? Professor Kabir has mentioned, “Throughout Indian history, we find on the one hand a tendency towards unification on the basis of religion and culture and on the other fragmentation due to differences in language, customs, economic and political interests.” In modern Indian society, the Indian Constitution upholds the democratic principles of social organisation. Education is the weapon of democracy to bring social justice by emphasising equality of opportunities, accepting the social changes and to create a society above the basis of caste, colo...