Posts

Showing posts from September, 2021

Teaching tactics ( शिक्षण युक्तियाँ ) in hindi | शिक्षण युक्ति/सूत्र क्या है?

Image
Teaching tactics (शिक्षण युक्तियाँ) शिक्षण युक्ति/सूत्र क्या है? शिक्षण का सूत्र :  शिक्षण सूत्र को कामेनियस एवं हरबर्ट स्पेन्सर आदि ने अपने अनुभवों के आधार पर कुछ सामान्य नियम निर्धारित किये थे, जिन्हें बाद में शिक्षण सूत्र के नाम से जाना जाने लगा। अध्यापक की प्रभावशीलता विषय पर स्वामित्व तथा उसमें व्यावसायिक योग्यता होते हुए भी यह आवश्यक नहीं है कि वह छात्रों के लिए उपयोगी प्रमाणित हो। वास्तविक अर्थ महत्व अध्यापक वह है जो अपने ज्ञान तथा अनुभवों की व्याख्या छात्र के मस्तिष्क तक पहुंचा सके। छात्रों को उनकी रुचि एवं जिज्ञासा के अनुकूल ज्ञान की विभिन्न शाखाओं से परिचय प्राप्त कराना अध्यापक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में सम्मलित है। कक्षा के अंदर अध्यापक का मुख्य लक्ष्य होता है कि वह एक ऐसे वातावरण का सृजन करें जिसमें अधिक से अधिक सीखने की क्रियाएं तथा सीखने के अनुभव उत्पन्न किये जा सके। इस दृष्टि से मनोवैज्ञानिक खोजों के आधार पर शिक्षा शास्त्रियों ने कुछ शिक्षण सूत्रों को प्रतिपादित किया है। इन शिक्षण सूत्रों के उपयोग करने से शिक्षण क्रियाएं विद्यार्थियों के लिए सर्वाधिक रूप में उपय...

बिहार राज्य के संदर्भ में बचपन और उसके विकासात्मक परिप्रेक्ष्य का विश्लेषण

Image
    Q 2. बिहार राज्य के संदर्भ में बचपन और उसके  विकासात्मक परिप्रेक्ष्य का विश्लेषण करें। उत्तर -  बचपन एक आनंददाई अवस्था के रूप में, विभिन्न आर्थिक परिस्थितियों में बचपन, वयस्क  संस्कृति, भारतीय संदर्भ में बहू- बचपन   जो निकाला कर बादलों की गोद से  थी अभी एक बूंद कुछ आगे बढ़ी  सोचने फिर फिर यही जीने लगी  क्यों घर छोड़कर मैं यूं खड़ी दैव |   मेरे भाग्य में है क्या बता ?  मैं नाचूंगी या मिलूंगी धूल में  जालौर चुंगी जी रंगा रे पर किसी  छुपा लूंगी या कमल के फूल में ||  मां की कोख से निकालकर नन्हा शिशु इस संसार में आता है, वैसे ही वह सबके ध्यान का केंद्र बिंदु बन जाता है। एक बालक स्वयं में एक बड़ी जिम्मेदारी है जिसका निर्वाह माता-पिता को करना होता है। हाल ही में जन्मा शिशु कितना नाजुक, कितना कोमल और कितना सुंदर होता है। " बाल्यावस्था जीवन का स्वर्णिम काल होता है " क्योंकि " न किसी की फिकर ना किसी की चिंता "। ना रोजी रोटी कमाने का टेंशन और ना ही ; आपसे किसी की किसी भी तरह की कोई अपेक्षा । अपितु सब बालक की देख-भाल में...

Cryptocurrency से हैं कन्फ्यूज! आइए, इस `सीक्रेट` करेंसी के बारे में जरा खुलकर जानते हैं...

Cryptocurrency से हैं कन्फ्यूज! आइए, इस `सीक्रेट` करेंसी के बारे में जरा खुलकर जानते हैं... आसान भाषा में कहें तो क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) एक डिजिटल कैश (Digital Money) प्रणाली है, जो कम्प्यूटर एल्गोरिदम पर बनी है. यह सिर्फ डिजिट के रूप में ऑनलाइन रहती है. इस पर किसी भी देश या सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। क्रिप्टोकरेंसी को लेकर आजकल खूब चर्चा हो रही है.  बिटक्वॉइन  (Bitcoin) के एक क्रिप्टोकरेंसी है. इस आर्टिकल में हमको आप इसी क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) के बारे में विस्तार से बारे में बताएंगे. इसके हर पहलू से आपको रू-ब-रू कराएंगे, साथ ही बताएंगे कि इसका भारत में चलन है या नहीं, इसका भविष्य में इस्तेमाल कैसे होगा? क्रिप्टोकरेंसी की पूरी एबीसीडी के बारे में हमारे एक्सपर्ट क्षितिज पुरोहित ने हमें खुलकर बताया है. क्या होती है क्रिप्टोकरेंसी? Cryptocurrency दो शब्दों से मिलकर बना शब्द है. Crypto जोकि लैटिन भाषा का शब्द है जो cryptography से बना है और जिसका मतलब होता है, छुपा हुआ/हुई. जबकि Currency भी लैटिन के currentia से आया है, जो कि रुपये-पैसे के लिए इस्तेमाल होता ह...

पाठ्यचर्या में भाषा की भूमिका एवं महत्व, मातृभाषा का स्थान, पाठ्य पुस्तकों की भाषा

Image
    पाठ्यचर्या में भाषा की भूमिका एवं महत्व, मातृभाषा का स्थान, पाठ्य पुस्तकों की भाषा  Role and importance of language in the curriculum : place of mother language  ' पाठ्यचर्या ' शिक्षा शास्त्र का बड़ा रोचक विषय है। कुछ समय पूर्व इस शब्द का बड़ा संकुचित अर्थ लगाया जाता था, किंतु अब हम पाठ्यचार्य में विद्यालय के समस्त अनुभव को सम्मिलित कर लेते हैं । छात्रा कक्षा में या कक्षा से बाहर विद्यालय की सीमा के अंतर्गत किसी स्थल पर जो कुछ अनुभव करता है,वह सब पाठ्यचर्या है।  पाठ्यचर्या का एक आवश्यक पक्ष विभिन्न विषयों का अध्ययन - अध्यापन भी है। ज्ञान विज्ञान के अनेकानेक विषय हैं और किसी विषय को छोटा या बड़ा कहना युक्तिसंगत नहीं है। सभी विषयों का अपना महत्व है। हां यह बात अवश्य है कि कुछ विषयों को हम पहले और कुछ विषयों को बाद में  पढ़ना - पढ़ाना चाहते हैं; और कुछ विषयों को देशकाल की आवश्यकता अनुसार अनिवार्य रूप से और कुछ को वैकल्पिक रूप से पढ़ना - पढ़ाना चाहते हैं। ज्ञान विज्ञान के इन अनेकानेक विषयों को हम विभिन्न भाषाओं के माध्यम से पढ़ाते पढ़ाते हैं।  आजकल साध...

ई - विषय वस्तु ( ई - मैग्जीन , ई - जर्नल्स ) का वर्तमान शिक्षा में प्रयोग ।

    ई - विषय वस्तु ( ई - मैग्जीन , ई - जर्नल्स ) का वर्तमान शिक्षा में प्रयोग  ई-पाठ्यवस्तु या अन्तर्वस्तु का अर्थ- शिक्षा में ई-पाठ्यवस्तु एक ऐसा लचीला आधार प्रदान करता है जिसकी सहायता से इण्टरनेट से इण्टरनेट साइट, उपभोक्ताओं से सम्बन्ध बनाये रखना तथा सहयोगियों और कर्मचारियों के मध्य सम्बन्ध विकसित करना आसान होता है। ई-पाठ्यवस्तु किसी ऑर्गेनाइजेशन को वेब सर्विस के माध्यम से अधिकार प्रदान करता है। 1. यह साइट को प्रभावशाली बनाने में संगठन की मदद करती है। 2. यह प्रबन्धकीय अन्तर्वस्तु को डेटाबेस के आधार पर संग्रह रखता है। 3. यह प्रयोग करने पर एक्स. एम. एल. (XML), संग्रहालय (Repositories) तथा अविरल फाइल (Static files) एवं अन्तर्वस्तु प्रदर्शित करता है। 4. वर्तमान समय में ई-अन्तर्वस्तु किसी भी टीम आधारित व्यापार की कुंजी है। 5. यह उपभोक्ताओं, कर्मचारियों, व्यापार को कच्चा माल प्रदान करने वाले सप्लायर तथा वितरकों के साथ अधिकारों के अनुरूप संचार कार्य करता है। 6. ई-अन्तर्वस्तु कार्य करने में सरल तथा परम्परागत प्रबन्धन सेवा की तुलना में अधिक विश्वसनीय होते हैं। 7. ई-अन्तर्वस्तु क...

C-4:Language Across The Curriculum भाषा एक विषय और एक माध्यम के रूप में

Image
C-4:Language Across The Curriculum  भाषा एक विषय और एक माध्यम के रूप में  परिचय: सभी प्राणियों में केवल मानव ही ऐसा प्राणी है जो भाषा जानता है। भाषा के कारण ही मानव का जीवन अन्य प्राणियों से अधिक शुभ माना जाता है। भाषा मानव को दिया गया प्रकृति का वरदान है अथवा ईश्वर की ही वह प्रदत्त शक्ति है जिसका मानव उपभोग करता है।   बॉम हम्बोलर  ने लिखा है कि " भाषा के कारण ही मनुष्य,मनुष्य है, पर भाषा के अविष्कार के लिए उसका पहले से ही मनुष्य होना आवश्यक है। प्राचीन विचारक भाषा को ईश्वरीय कृति मानते थे। इसी कारण संस्कृत को देव वाणी की संज्ञा प्रदान की गई है। पतंजलि ने ईश्वर को ही भाषा का आदि गुरु माना है। मानव सभ्यता तथा संस्कृति के विकास में भाषा का महत्वपूर्ण योगदान है। आशा को सभ्यता की कहानी भी कहा जा सकता है। जिस साधन से हम अपने भावों तथा विचारों को दूसरों तक पहुंचा सकते हैं, वही भाषा है। भाषा एक विषय के रूप में ( language as a subject )   भाषा को एक विषय में रखने का मुख्य उद्देश्य छात्रों को भाषा का व्याकरण की जानकारी से परिचित कराना है। आज यह एक दुर्भाग्य ही ...

आत्म को प्रभावित करने वाले कारक

Image
  Q. आत्म को प्रभावित करने वाले कारकों की विवेचना करें । (seem Discuss the factor Influencing Self )   ऐसा देखा गया है कि एक बार जब आत्मा का निर्माण व विकास हो जाता है, तब वह कुछ विशिष्ट व्यवहार प्रतिमान अपना लेता है और कुछ ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती है, जो उसे किसी प्रकार के परिवर्तन से प्रभावित ना होने के लिए क्रियाशील कर देती है। व्यक्ति अपने चारों और जो अंतर व्यक्ति को पर्यावरण निर्मित करता है, वह अच्छा ही होता है। व्यक्ति पर वातावरण से उत्पन्न परिस्थितियां परिवर्तन के लिए उस पर दबाव डालती है परंतु व्यक्ति आत्म की स्थिरता बनाए रखने का प्रयास करता है। उसे आत्म के द्वारा मदद मिलती है,जैसे -   व्यक्ति की स्वयं के बारे में अवधारणा  व्यक्ति का अधिगम व्यवहार प्रतिमान  दूसरे व्यक्तियों के प्रत्यक्षीकरण के बारे में उसके व्यक्तिगत तरीके।   व्यक्ति के आत्म के इस पहलू के संबंध में दूसरे व्यक्तियों के व्याख्या और अनुभव क्या है तथा इस संबंध में व्यक्ति के क्या विचार हैं।  आत्मा और व्यवहार की स्थिरता बनाए रखने के लिए व्यक्ति इन तीनों में ही समरूपता बनाए रख...

C - 3 Learning and Teaching Unit - 1 full syllabus

Image
  C - 3 Learning and Teaching Unit - 1 अधिगम से सम्बंधित अवधारणाएँ Concept related to Learning अधिगम / सीखना : विभिन्न विचारों से परिचय • Learning : Introduction to multiple views  अधिगम को प्रभावित करनेवाले प्रमुख कारक • Major factors affecting learning  सीखने में एकाग्रता की भूमिका एवं इसका संवर्धन • Role of concentration in learning and its enhancement Analytical understanding of relations : Learning and Development अंतर्सम्बंधों की विश्लेषणात्मक समझ : अधिगम और विकास , Learning and Motivation ; Learning and intelligence अधिगम और अभिप्रेरणा , अधिगम और बुद्धि  अधिगम या सीखने को किसी एक ढंग से परिभाषित नहीं किया जा सकता क्योंकि इसके विषय में अलग - अलग समाज एवं संस्कृतियों में भिन्न - भिन्न मान्यताएँ हैं जो लोकसंस्कृतियों , लोकोक्तियों , रीति - रिवाज , संस्कार या फिर सामाजिक परम्पराओं के रूप में वहाँ विद्यमान हैं । इस विषय में अलग - अलग व्यक्तियों की भी अपनी - अपनी मान्यताएँ हो सकती हैं जैसे कि शिक्षार्थी . अध्यापक , अभिभावक आदि । अतः इस इकाई की शुरुआत अधिगम से सम्बंध...